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हिमाचल में नई जॉब पॉलिसी को लेकर उबाल, आंदोलन की चेतावनी

हिमाचल अनइंप्लॉयड यूथ फेडरेशन ने सीएम को भेजा पत्र, नई दक्षता परीक्षा नीति का विरोध
श्रेय अवस्थी बोले – नियुक्ति के बाद दोबारा परीक्षा युवाओं के साथ अन्याय
फैसला वापस नहीं लिया तो प्रदेशभर में होंगे विरोध प्रदर्शन, सरकार को चेतावनी


हिमाचल प्रदेश में बेरोजगार युवाओं ने सरकार की नई “जॉब ट्रेनी” नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा अनुबंध आधार पर भर्तियों को समाप्त कर दो साल की ट्रेनी योजना लागू करने की अधिसूचना जारी की गई है। इसके तहत युवाओं को पहले दो साल तक प्रशिक्षु के तौर पर रखा जाएगा और फिर पुनः एक दक्षता परीक्षा के आधार पर उन्हें नियमित किया जाएगा। इस नीति से क्षुब्ध बेरोजगार युवाओं ने इसे उनके भविष्य के साथ भद्दा मजाक करार दिया है।

शिमला के राज्य पुस्तकालय में सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सैकड़ों युवाओं ने इस नीति का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार पिछले अढ़ाई वर्षों से नाम मात्र ही सरकारी नौकरियां दे रही है और अब ट्रेनी योजना लागू कर युवाओं को और भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। बेरोजगारों ने पूछा है कि अगर कोई युवा दो साल नौकरी करने के बाद पुनः परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसका क्या होगा? क्या सरकार उनके दो साल की सेवा को दरकिनार कर देगी? इस पूरी योजना में पारदर्शिता और स्थायित्व की कमी स्पष्ट रूप से नजर आ रही है।

युवाओं का कहना है कि सरकार नौकरियां देना ही नहीं चाहती है। यह योजना महज बेरोजगारी के आंकड़े दबाने और युवाओं को अस्थायी समाधान देने की कोशिश है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने सात दिन के भीतर यह नीति वापस नहीं ली तो पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

युवाओं का यह भी आरोप है कि सरकार ट्रेनी के नाम पर न्यूनतम वेतन देकर युवाओं से कार्य तो करवाएगी, लेकिन भविष्य को अनिश्चितता में डाल देगी। उन्होंने इसे “स्थायी समाधान नहीं, अस्थायी शोषण” करार दिया है।

उधर, प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लाई गई “दो वर्षों के पश्चात दक्षता परीक्षा द्वारा नियमितीकरण” की नई नीति को लेकर हिमाचल अनइंप्लॉयड यूथ फेडरेशन ने तीखा विरोध जताया है। संगठन के राज्य संयोजक श्रेय अवस्थी ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक पत्र लिखकर इसे युवाओं के साथ विश्वासघात करार दिया है।

पत्र में श्रेय अवस्थी ने स्पष्ट किया कि सरकारी भर्तियों की रफ्तार पहले से ही बेहद धीमी है। पिछले तीन वर्षों में कभी भर्ती आयोग का गठन न होना, तो कभी चयन प्रक्रियाओं का निजी कंपनियों से अनुबंध के कारण अटक जाना, लगातार युवाओं की निराशा और कुंठा का कारण बना है। ऐसे में अब यह नई नीति, जिसमें नियुक्ति के दो साल बाद फिर से दक्षता परीक्षा देने की बाध्यता है, युवाओं के लिए न्याय के बजाय सजा जैसी लग रही है।

उन्होंने सरकार से यह सवाल भी किया कि क्या यह नीति सभी सरकारी विभागों व श्रेणियों पर लागू होगी, या केवल तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को ही इसका निशाना बनाया गया है?

अवस्थी ने कहा कि जब एक युवा पूरे चयनित प्रक्रिया से गुजरकर नौकरी पाता है, तो दो साल बाद फिर से परीक्षा लेना न सिर्फ अपमानजनक है बल्कि यह सरकार की खुद की चयन प्रणाली पर अविश्वास को भी दर्शाता है।

फेडरेशन ने इस नीति को तुरंत प्रभाव से रद्द करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो प्रदेश का युवा सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नीति का विरोध नहीं, बल्कि भविष्य से खिलवाड़ के खिलाफ आवाज है।